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Īśvaradarśanam · Amaranāthayātrā

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    स्वामी । बहिर्निर्ययौ । साधुसमागमसौभाग्यमनुस्मरन्तश्च । मुमुचुः । च । कश्चित् । मञ्जुलमयाञ्चक्रे । द्वित्राः । तेन । सत्सङ्गमाभिलाषी । चासादितमासीत् । तत्तत्प्रसङ्गेषु । जानीमहे । च । सर्वत्र । इति ।  ॥ १ ॥
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    सुदीर्घाः ।  ॥ २ ॥
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    उरुच्छविदृश्यदर्शनाढ्याम् ।  ॥ ३ ॥
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    व्रज्याश्रमविनिवृत्तये । दृष्टाः । इति । नटेशससहायः । स्वामी । समग्रमतिलङ्घितुमुत्सेहे । महान्तमलौकिकमाह्लादमुदपीपदत् । सभक्तिकममाङ्क्षीत्सः । सन्ददर्श । तस्य ।  ॥ ४ ॥
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    साक्षात् ।  ॥ ५ ॥
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    समस्ताः ।  ॥ ६ ॥
  7. 7
    सत् ।  ॥ ७ ॥
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    करबिल्वतुल्यमित्थम् ।  ॥ ८ ॥
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    चेतसि । श्रीनगरोपान्तपर्यन्तम् । सश्रद्धम् । केवलया । पञ्चषवादनावसरे । श्राव्यतामिति । इति । निरगात् । सम्यङ्निरूपितः । व्यपदिश्यते । नैतच्छिक्षणीयम् । प्रभृतिभिः । इत्युच्यते ।निदर्शनम् ।  ॥ ९ ॥