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। ॥ 1-2 ॥
। ॥ 1-3 ॥
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। ॥ 1-17 ॥
पदे । ॥ 1-18 ॥
चिरम् । ॥ 1-19 ॥
। ॥ 1-20 ॥
। ॥ 1-21 ॥
। ॥ 1-22 ॥
। ॥ 1-23 ॥
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। ॥ 1-30 ॥
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। ॥ 1-40 ॥
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। ॥ 1-49 ॥
यदज्ञानाज्जगद्भाति रज्जुसर्पस्रगादिवत् ।यज्ज्ञानाल्लयमाप्नोति नुमस्तां भुवनेश्वरीम् ॥ 1-50 ॥
। ॥ 1-51 ॥
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। ॥ 1-60 ॥
वा । ॥ 1-61 ॥
। ॥ 1-62 ॥
। ॥ 1-63 ॥
। ॥ 1-64 ॥
। ॥ 1-65 ॥
हिमालयोऽपि तच्छ्रुत्वात्यनुग्रहकरं वचः ।बाष्पैः संरुद्धकण्ठाक्षो महाराज्ञीं वचोऽब्रवीत् ॥ 1-66 ॥
। ॥ 1-67 ॥
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। ॥ 1-69 ॥
। ॥ 1-70 ॥
। ॥ 1-71 ॥
। ॥ 1-72 ॥
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। ॥ 1-74 ॥