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Śrīmad Bhāgavatam · The Forest and the Wandering Life

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    श्रीभगवानुवाच ।वनं विविक्षुः पुत्रेषु भार्यां न्यस्य सहैव वा ।वन एव वसेच्छान्तस्तृतीयं भागमायुषः
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