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। ॥ 9-11 ॥
। ॥ 9-12 ॥
प्रतिजाने भवादस्मादुद्धराम्यचिरेण तु ।ध्यानेन कर्मयुक्तेन भक्तिज्ञानेन वा पुनः ॥ 9-13 ॥
। ॥ 9-14 ॥
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ये न कुर्वन्ति तद्धर्मं तच्छिक्षार्थं मया सदा ।सम्पादितास्तु नरकास्त्रासो यच्छ्रवणाद्भवेत् ॥ 9-24 ॥
। ॥ 9-25 ॥
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