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Īśvarapratyabhijñā Vimarśinī · Āhnika 6

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    । । ॥} । । । । । । । । । , । । । ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ।} । , , । ॥§०§ । । ---- । , ? ---- , ---- , , , । । ॥§१§
  2. 2
    , , , । , , , ? । । , , ॥ २ ॥ , , ? , , । ॥§०§ , , ---- । , ---- , , , , , , , , ---- , ---- । , ---- ॥ ३ ॥ ऽ;
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    , ---- ॥ ५ ॥ ऽपि -- ---- , । ऽपि , ऽहं ऽभवं ऽहं , , , , । , , ऽपि । ॥§०§ , ऽवभासो , ऽहं , , , । ---- , ऽविच्छिन्ने ऽनुधिः ।(क्स्स्: हि) , , , , , स ऽपि , ॥ ६ ॥न च देहादीनां पूर्वपूर्वप्रमातृवेद्यता येन प्रमातुरप्रकाशे प्रमेयं न भाति तत्प्रकाशश्च न पूर्वप्रकाशं विना , सो ऽपि न प्रमात्रन्तरप्रकाशं विना इत्यनवस्था स्यात् , तु शुद्धप्रकाश एव विश्वस्य प्रकाश इति रूपय उक्तयुक्त्या सदैव सृष्ट्यादिशक्त्यवियोगो भगवत उक्तो भवति , तदेवं व्यवहारेऽपि प्रभुर्देहादिमाविश ।भान्तमेवान्तरर्थौघमिया ॥§१§
  6. 6
    , ? , , , , । । , , , , , ? , । , , , , , । । ॥} । । ॥} ।{ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ । । ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥} ॥ ७ ॥ , , , , , । ॥§०§ , , ---- , , ---- । , ॥ ८ ॥
  7. 7
    , ---- । ॥§०§ । , , , । , , ॥ ९ ॥ । ॥§१§ , , ॥ १० ॥ । ॥§२§ , । ।}